Monday, 20 January 2020

उनके लिए

जब युवा मांग रहें हैं
बेरोजगारी से लड़ने हेतु
रोजगार
ऐसे समय वे थमा रहें हैं
तुम्हारे हाथों में खुश रहने के नुख्शे
तुम्हे ही गलत साबित करके

जब तुम लड़ रहे हो भूख से
वे दिखा रहें हैं
तुम्हे हसीन सपनों के सब्जबाग
और आसानी से कर लेते हो यकीन
भूख से अधिक आवश्यक है
सपने
एवं चल लेते हो सपनों की खोज में

जब तुम सोच रहे होते हो
अपने बारे में
वे बताते हैं तुम्हारे कर्तव्य
जिनके लिए तुम्हे छोड़ना होता है
अपने बारे में सोचना
और तुम छोड़ देते हो
उनके लिए सब कुछ 
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कौन हैं वे लोग

कौन हैं ?
वे लोग
जो लगा रहे हैं
अमन चैन सें आग
और जलते रहने के लिए
लगातार डाल रहें हैं
नफ़रती घी

कौन हैं ?
वे लोग
जो चूस रहें है
अमीरों को और अमीर बनाने के लिए
पी रहें हैं गरीबों का लहू
अपने दिखावटी मासूम अदाओं की
आड़ में

कौन है ?
वे लोग
जिनकी बाते पूरित होती है
विश्वास के स्थान में
अविश्वास द्वारा 




Sunday, 19 January 2020

****शिलालेख नहीं होती****

शिलालेख !
नहीं होती जिंदगी
जिसे अंकित करा दिया जाये
किसी राजा के द्वारा
भाषाविद की मदद से
राजाज्ञा के रूप में
ना ही हकीकतों से दूर 
भागने का नाम है 
बल्कि समय की चुनौतियों को 
स्वीकार कर
जीने की कला है
जिसमें रिक्त रहती है 
हमेशा कुछ जगहें
जिसमे समाहित होती हैं
मासूमियत, आवारगी
और नादानी 
जिनसे होकर गुजरती बेलौस जिन्दगी

*****अफीमचियों का प्रेम*****

अफीमचियों का प्रेम ही है
कोई सेवन करता है
नशे के रूप में
कोई नफे के लिए
दोनो का वह प्रेम ही है
जो जोड़े रहता है 
उन्हे एक दूसरे से 
इच्छा न होते हुए भी
एक सरकता है धीरे से 
और पूंछता है करीब आने पर
क्या अफ़ीम लोगे ?
दूसरा कहता ही नहीं 
बल्कि भरता है 
नकार के साथ हामी भी
अफीम के प्रति ।
क्योंकि अफीमचियों का प्रेम 
होता ही ऐसा है
जो लाख बुराइयां होने के बावजूद
बना रहता है
एक दूसरे से पूर्व की भाँति 
स्थिर और मजबूत

Saturday, 18 January 2020

****केवल मुस्कुरा देते हैं ****

पढ़-लिख गए हैं
अब
उन्होने पढ ली है 
संसार की तमाम पोथियां
जिनमे लिखा हुआ है
नफ़रत वह फौलादी अवरोध होती है
जिसके पार जा सकना
आसान नहीं होता
मुकम्मल तैयारियों के साथ ही
विजित की जा सकती हैं
ऐसी दीवारें
यद्यपि उन्होने इनसे निपटने के लिए
 खरीद लिया है
जुराब और दस्ताने 
जिससे बचा जा सके आसानी से
इसीलिए उन्होने बदल लिया 
अपना पारम्परिक पैतरा
अब वे नहीं हंसवे हैं
खुलकर
बल्कि समय की नज़ाकत भांपकर
केवल मुस्कुरा देते हैं

****यह सच है***

यह सच है !
समय के साथ बदलता रहता है
दुनिया में बहुत कुछ
फिर वह चलती रहती है
अपनी ही रफ्तार के साथ अनवरत
कुछ चीजें हैं
जो कभी नहीं बदलती 
या यूँ कहे नही बदल सकती
मसलन प्राकृतिक वैभव से युक्त
खुशी झलक पड़ती है
पूरी मासूमियत के साथ
चेहरों में मुस्कुराहट के रूप में
यद्यपि कुछ लोग
तंज कसते हैं
चेहरों में खिली मुस्कुराहट को देखकर पर
पर रोक नहीं पाते
चेहरों से नव किल्लियों के रूप में
फूटती सच्ची हंसी को

Thursday, 16 January 2020

***उदास होती***

हाँ ठीक सुने हो
अक्सर उदास होती हैं
खिलखिलाती सुबहों की शामें
जैसे हंसती जिंदगी
लौट पड़ती है
समय के पड़ाव पार करते हुए
उदासी की ओर
वायु के झकोरों से लड़ता हुआ
दीपक
तेल के खत्म होने पर
उदास होकर
बुझने लगता है
और छोड़ जाता है
कालिख की स्याही 
रात्रि के माथे पर
उदास होने की 
स्मृति के रूप में